Friday, December 3, 2021
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सांगला कंडे आने की इच्छा बहुत समय से थी, लेकिन आज  पूरी  हूई थी। आज का प्लान भी अचानक ही बना था, बातों बातों में ही महेश सर आज साथ आने को तैयार हो गये, रही बात हमारी हम...
एक तरफ बर्फ से ढके पत्थर के ऊंचे ऊंचे पर्वत तथा दूसरी तरफ देवदार के जंगलों से भरे सफेद पर्वत और बीच से नागिन सी बलखाती बास्पा नदी, नजारा कुछ ऐसा था कि मैं पलकें झपकाना  ही भूल गया।...
सांगला घाटी - प्राकृतिक सौंदर्य से सरावोर हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिला की सांगला घाटी अत्यंत ही रमणीक स्थान है जो बर्बस ही अपनी ओर आकर्षित करती है। सांगला घाटी हिमालय की सुन्दरतम घाटियों में से एक है। बस्पा नदी...
हर हफ्ते आ जाता है ये रविवार सोचने को मजबूर करता है कि क्या किया जाए इस बार! इस रविवार को सांगला घाटी में बास्पा नदी के किनारे बसे एक छोटे से लेकिन बेहद ही खूबसुरत गांव, "आजाद कश्मीर" के...
“खूबसूरती ऐसी,जो आंखों से सीधे दिल में उतरकर, कर दे दीवाना।  जहां सनसनाती ठण्डी हवाओं के झोंकों संग  उड़ते बादल गाते हैं मधुर तराना।  देवदार के पेड़ पहरेदार हों जैसे इन हसीन वादियों के...... खुद से मुलाकात करने की पहाड़ों से बेहतर कोई...
  हिमरी गंगा / डायना पार्क /स्वर्णिम वाटिका बासाधार भारत एक लोकतांत्रिक देश है,इसलिए यहां समय-समय पर लोकतंत्र का सबसे बड़ा महापर्व यानी चुनाव होते रहते हैं। चुनाव को सफल बनाने के लिए सरकारी कर्मचारी बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।...
पराशर झील - मण्डी जिला की उतरशाल पहाड़ियों पर स्थित यह छोटी सी प्राकृतिक झील सबको अपनी तरफ़ आकर्षित करती है। यह झील समुद्र तल से तक़रीबन 2700 मीटर की ऊंचाई पर है। मण्डी से पराशर झील की दुरी 50 किलोमीटर और...
बारसेला (सती स्तंभ) मण्डी, हिमाचल प्रदेश।   भारतवर्ष की संस्कृति बेहद प्राचीन एवं समृद्ध है लेकिन कुछ कुरितियां ऐसी रही हैं जो हमारी संस्कृति की महानता के दावे पर सवालिया निशान लगाती रही हैं।इनमें से कुछ समय के साथ खत्म हो...
प्राकॄतिक खूबसूरती से सरोबार, मनमोहक तथा दिलकश नजारों को आंचल में समेटे हुए हिमालय की ऊंची ऊंची पर्वत श्रृंखलाओं से निकलता गंगा सा पवित्र जल, शायद इसलिए ही इसे "गंगारंग" की संज्ञा दी गई है। गंगारंग, प्राकृतिक खुबसूरती के...
कालेज की छुट्टियो में किन्नौर घुमने आये मेरे भांजे को किन्नौर के दर्शनीय स्थल दिखाने का जिम्मा मेरे उपर था।किन्नौर के दर्शनीय स्थलों की बात हो और छितकुल का नाम न लिया जाए तो इसे गुस्ताखी ही कहा जाएगा।...
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