कविता- तृतीय विश्व युद्ध

कविता - तृतीय विश्व युद्ध विकास के पहिए शहरों की ढेर सारी आबादी को वापिस छोड़ आए हैं गांव ये कहकर, कि यही है सबसे सुरक्षित ठिकाना अनिश्चितकाल के लिए गांव की प्रतिष्ठा में लग गए...

क्योंकि मैं इन्सान नहीं (कविता)

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क्योंकि मैं इन्सान नहीं। मैं हिंदू हूं, मैं मुस्लिम हूं, मेरी और कोई पहचान नहीं, क्योंकि मैं इंसान नहीं। अपनों की छोटी सी चोट पर, जो खून खौलता है मेरा, गैरों की...

दो कवितायेँ – दर्द और है ज़िन्दगी

 1. दर्द दर्द को समझने के लिए पहले मैंने बाजू में चीरा लगाया, फिर भी मुझे, वह दर्द महसूस नहीं हुआ। फिर मैंने ज़ख्म में नमक मिला लिया, पर फिर भी मुझे, उतना दर्द नहीं हुआ। मैं समझ...

राजीव डोगरा की दो कवितायेँ

1. बाल कविता आओ हम स्कूल चले नव भारत का निर्माण करें। छूट गया है जो बंधन भव का आओ मिलकर उसको पार करें, आओ हम स्कूल चले ..... जाकर स्कूल हम गुरुओं का मान करें बड़े बूढ़ों का...

खुशबू (छात्रा) की कविता – हिंदी

कविता - हिंदी हिंदी भाषा की शान है, हिंदी को देते हम सम्मान हैं। हिंदी हमें सब कुछ सिखाती है। व्याकरण का ज्ञान करवाती है। हिंदी भारतीयों की भाषा है इसमें हमें न कोई निराशा है। हिंदी सबको बोलनी आती है, सबके दिलों को...

राजीव डोगरा की कविता हिंदी हिंद की शान है

हिंदी हिंद की शान है, बिंदी जिसकी पहचान है। हिंदी जननी है मातृभाषा अभिमान है, जिस पर हमे आता। फूल पत्तों जैसी ये खिलती। हर भाषा में जा, ये गुल मिलती। स्वर व्यंजन जिसकी पहचान है। संयुक्त वर्ण जिसकी शान हैं। अर्ध...