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अनुराधा की दो कवितायेँ

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  1. वक्त बदले ज़िन्दगी 

वक्त बदला
एहसास बदले
कल बदला
और आज बदले ।
कुछ लम्हे बदले
कुछ स्वयं से हैं सवाल बदले।
वक्त है ,फिर बदलेगा
इसके बदलते ही ,
हर बवाल बदले ।
तुम नहीं बदले आज भी
वक्त ने हैं हालात बदले।
जी ले जिन्दगी को जी भर के
आज बदली है
कल फिर बदलेगी
पल पल बदली है
पल -पल बदले ।

–अनुराधा…
(6.2.2018)

2. नदी की विडम्बना
नदी की विडम्बना
देखो,
पहले बहती थी
अविरल
हिलोरे खाती
मचलती उछलती नदी ।

गिरती थी
पहाड़ों की ऊँचाइयों से,
अथाह गहराइयों तक
बहती थी मैदानों में
फैलाव के साथ ,
असीम लंबाइयों तक ।

आज पहाड़ों से गिरती नहीं,
नदी
बनता नही प्रपात कोई ,
संकरी होती जाती है ,
खाईयों में आने से ,
नहीं
बल्कि,मानव के प्रहारों से
खुद को समेटने की कोशिश में
नदी …।।

–अनुराधा…
15-9-2018

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