कविता – बात कहीं और ले गया

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कविता – बात कहीं और ले गया
बदली थी सरकार हमने
क्या जोश था
आख़िर बदलाव आया था,
मन में एक भाव आया था
की अब देश बदलेगा !
नहीं मरेगा किसान,
नहीं होगा सीमा पर  बलिदान !
कला धन आएगा
और गरीब भी खुशहाल हो जायेगा,
भ्रष्टाचार खत्म हो जायेगा,
वर्दीवाला भी प्यार से बतयायेगा !
आम जनता की भी इज्जत होगी,
लाचार नहीं दबाया जायेगा ।
एक उज्जवल भारत के,
सपने देख लिए थे,
एक जनून था,
की अब तो बदलाव जरूर आएगा,
दिन गुजर रहे है ……

और जनून एक वोट है !
जो अगले चुनाव में फिर जगा दिया जायेगा !
नहीं जगा तो,
भड़का दिया जायेगा !
शायद…….
मैं बात कहीं, और ले गया !!!!

  • बलवंत ‘नीब’
    20-08-2015

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