कविता – बात कहीं और ले गया

कविता – बात कहीं और ले गया बदली थी सरकार हमने क्या जोश था आख़िर बदलाव आया था, मन में एक भाव आया था की अब देश बदलेगा ! नहीं मरेगा किसान, नहीं होगा सीमा पर ...

यादें (कविता)

जब भी तन्हा होता हूं मैं आजकल,अक्सर याद आ जाता है बीता हुआ कल। वो हसीन यादें वो यादगार लम्हे, वो साथ में गुजरा हर एक पल। हवा का हर एक झोंका...

कुछ तो करना होगा(कविता)

“कुछ तो करना होगा” हो रहा है आज जो दूसरों के साथ, कल तेरे साथ भी हो सकता है, तू  जो बना है आज तमाशबीन कल तमाशा तेरे साथ भी हो...

सोच,साथ क्या जाएगा? (कविता)

एक बस सफर के दौरान बस में लिखे वाक्य “सोचो,साथ    क्या जाएगा”को पढ़ कर इस कविता का विचार मन में आया था। सोच,साथ क्या जाएगा? “अनमोल बड़ी है ये जिंदगी,खुशी...

वापिस (कविता)

जब गुजरता हूं खुद किसी भयावह स्थिति से, तो सोचता हूं अक्सर उसकी वजह  मैं। चाहता हूं मिटा दूं उस वजह को ही, पर लौट आता हूं अक्सर उसी जगह मैं। गुजरा हूं...

कविता- “वक्त”

  वक्त का क्या कोई मोल है? वक्त बड़ा अनमोल है। जो वक्त की कीमत जानता है, उसे जमाना मानता है। हम ही बहते जाते हैं इस वक्त की धार में, वक्त कहां रुका करता...