Sunday, January 23, 2022
हो तपती गर्मी या हो सर्दी, उगाई फ़सलें तूने सदियों, हर मौसम की मार में।  तू कौन है?  जो आ खड़ा है, महल के द्वार में ।   चुप ही था तु तो सदा, सर झुका रहता था तेरा, हर दुख में हर हार में।  ऊँचा...
102FansLike
3FollowersFollow

Recent Posts