Friday, December 3, 2021
“कुछ तो करना होगा” हो रहा है आज जो दूसरों के साथ, कल तेरे साथ भी हो सकता है, तू  जो बना है आज तमाशबीन कल तमाशा तेरे साथ भी हो सकता है। क्यों पड़ूं मैं इन झमेलों में,इस सोच से तुझे...
कविता – बात कहीं और ले गया बदली थी सरकार हमने क्या जोश था आख़िर बदलाव आया था, मन में एक भाव आया था की अब देश बदलेगा ! नहीं मरेगा किसान, नहीं होगा सीमा पर  बलिदान ! कला धन आएगा और गरीब भी खुशहाल हो जायेगा, भ्रष्टाचार खत्म...
हिंदी हिंद की शान है, बिंदी जिसकी पहचान है। हिंदी जननी है मातृभाषा अभिमान है, जिस पर हमे आता। फूल पत्तों जैसी ये खिलती। हर भाषा में जा, ये गुल मिलती। स्वर व्यंजन जिसकी पहचान है। संयुक्त वर्ण जिसकी शान हैं। अर्ध अक्षर भी जिसका देता भाषा में, एक नई जान है। हिंदी हिंद की...
यार विवेक मैं सोच रहा हूँ क्यों ना इस बार चुनाव में अपनी गाय को खड़ा कर दूं। मैं खुद तो कभी चुनाव जीत नहीं सकता ! गाय को खड़ा किया तो बाकी सारे उम्मीदवार अपना अपना वोट भी...
सही गलत किसी बात से व्यथित मन,   व्यथित मन ने लिया ठान, क्या सही है क्या है गलत? अब तो वह यह लेगा जान। विचारों के विमान संग,  उड़ता फिर रहा था मन।  फिर दृश्य एक देखकर,  मन गया वही पर थम ।  ठीक उसी स्थान पर, खत्म हो...
एक बस सफर के दौरान बस में लिखे वाक्य “सोचो,साथ    क्या जाएगा”को पढ़ कर इस कविता का विचार मन में आया था। सोच,साथ क्या जाएगा? “अनमोल बड़ी है ये जिंदगी,खुशी से इसे  बीता ले तू। बड़े बड़े हैं सपने तेरे,हकीकत इन्हें...

यूँ ही

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ईश्वर हमारी कृति है,  मंदिर में प्रवेश तुम्हारी गुस्ताखी है । आस्था, आशीर्वाद, पूजा हमारे हिस्से,  तुम्हारे लिए ईश्वर का डर ही काफी है । रोटी - बेटी की बात तो सोचो ही मत तुम,  हमारे रास्ते, घर, कुएँ को छुने की सोचना ही...
कविता – नए प्रतिबिम्ब खो गए हैं वक्त के आईने से, जो सपने संजोए थे मैंने, समेटने की, कि थी कोशिश बहुत, पर बिखर गए सैलाब बन कर। धूमिल होते आईने पर उभर रहे हैं, प्रतिबिम्ब नए नए ! मिलते नहीं निशाँ साफ़ करने पर भी, छिप गए हैं धूल में, करवट बदल कहीं……… रह...
कविता-आस्तिक या नास्तिक? उसने पूछा कि तुम आस्तिक हो या नास्तिक? मैं कुछ ठिठका,क्योंकि इस बारे में सोचा न था अभी तक। सोच के मैं बोला, इस बारे में मेरा जवाब नहीं है निश्चित । क्या है मेरी मनोदशा वास्तविक? मैं आखिर आस्तिक हुं...
1. बाल कविता आओ हम स्कूल चले नव भारत का निर्माण करें। छूट गया है जो बंधन भव का आओ मिलकर उसको पार करें, आओ हम स्कूल चले ..... जाकर स्कूल हम गुरुओं का मान करें बड़े बूढ़ों का कभी न हम अपमान करें, आओ हम स्कूल चले....... जाकर स्कूल हम दिल लगाकर...
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